प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महोबा के पूर्व पुलिस अधीक्षक (एसपी) और आईपीएस अधिकारी मणिलाल पाटीदार के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने मामले को प्रथम दृष्टया विचारणीय मानते हुए विपक्षी पक्षों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, याचिका पर अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की एकलपीठ ने पूर्व आईपीएस मणिलाल पाटीदार की ओर से भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। समन आदेश को दी गई चुनौती
याचिका में महोबा के थाना कोतवाली नगर में दर्ज मुकदमे, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 174-ए के तहत पंजीकृत है, तथा स्पेशल जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) कोर्ट, लखनऊ द्वारा 8 अगस्त 2023 को जारी समन आदेश को चुनौती दी गई है। याची की ओर से कहा गया कि 22 जुलाई 2021 को दर्ज किया गया मुकदमा झूठे और मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है तथा उसे प्रताड़ित करने की मंशा से दर्ज कराया गया है। यह भी दलील दी गई कि लखनऊ की विशेष अदालत ने तथ्यों और परिस्थितियों पर समुचित विचार किए बिना समन जारी कर दिया। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को संज्ञान में लेते हुए फिलहाल आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है और सभी पक्षों से जवाब तलब किया है। यह है पूरा मामला - मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2020 की है। महोबा के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी को 8 सितंबर 2020 को संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगी थी। उन्हें कानपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पांच दिन तक इलाज के बाद 13 सितंबर 2020 को उनकी मौत हो गई। घटना से एक दिन पूर्व, 7 सितंबर 2020 को इंद्रकांत त्रिपाठी ने एक वीडियो जारी कर तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार पर गंभीर आरोप लगाए थे। वीडियो में उन्होंने आशंका जताई थी कि उनकी हत्या कराई जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि कारोबार संचालन के लिए छह लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी और रकम न देने पर उन्हें जेल भेजने या जान से मरवाने की धमकी दी गई थी। इंद्रकांत त्रिपाठी की मृत्यु के बाद उनके भाई रविकांत ने महोबा के तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार, कबरई थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर देवेंद्र, कांस्टेबल अरुण सहित दो अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले ने प्रदेशभर में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद मामले की सुनवाई पर अस्थायी विराम लग गया है। अदालत द्वारा विपक्षी पक्षों के जवाब और अगली सुनवाई के बाद ही आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट हो सकेगी।

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